शंकर मराठे - मुंबई, २५ फरवरी २०२६ : अभिनेत्री नरगिस के जाने के बाद सुनील दत्त अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे। करीबियों को डर था… कहीं ये गम उन्हें भी खत्म न कर दे। वो बिखर गए थे, खामोश हो गए थे, जैसे जिंदगी का मकसद ही चला गया हो। लेकिन फिर…जिस दर्द ने उन्हें तोड़ा, उसी दर्द को उन्होंने अपनी ताकत बना लिया।
लोग सोच रहे थे वो खुद को संभाल नहीं पाएंगे… पर सुनील दत्त ने ऐसा फैसला लिया, जिसने उन्हें सिर्फ संभाला ही नहीं — बल्कि हजारों जिंदगियों का सहारा बना दिया।
नरगिस की याद में उन्होंने नरगिस दत्त फाउंडेशन की स्थापना की — जो कैंसर के मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बना। जिस इंसान को डर था कि वो गम में टूट जाएगा… उसी ने अपने दुख को सेवा में बदलकर इतिहास रच दिया।

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