शंकर मराठे - मुंबई, ६ जुलै २०२६ : साल १९९० में राजश्री प्रोडक्शंस अपनी सबसे खूबसूरत प्रेम कहानी "मैंने प्यार किया" की शूटिंग कर रहा था। फिल्म में एक छोटा-सा रोमांटिक सीन था...लेकिन वही सीन आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार "मिरर किस" के रूप में मशहूर हो गया।
मगर शायद ही किसी ने सोचा होगा...कि इस सीन के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसने पूरी यूनिट को सोचने पर मजबूर कर दिया था। उस समय भाग्यश्री सिर्फ १८ साल की थीं। वह अपने होने वाले पति हिमालय दासानी से प्यार करती थीं और जल्द ही शादी करने वाली थीं। उन्होंने कभी किसी दूसरे लड़के को गले तक नहीं लगाया था।
जब डायरेक्टर सूरज बड़जात्या ने उन्हें बताया कि फिल्म में एक रोमांटिक सीन करना है...तो भाग्यश्री घबरा गईं। उन्होंने यह सीन करने से साफ़ मना कर दिया.और उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े। कुछ देर के लिए सेट पर सन्नाटा छा गया।
एक तरफ डायरेक्टर का नजरिया था और दूसरी तरफ एक नई अभिनेत्री की भावनाएँ और उसकी मर्यादा थी। करीब आधे घंटे तक सूरज बड़जात्या और सलमान खान इस समस्या का हल ढूँढ़ते रहे। तभी सूरज बड़जात्या के मन में एक अनोखा आईडिया आया..."अगर दोनों कलाकार एक-दूसरे को छुए बिना भी वही एहसास दर्शकों तक पहुँचा दें... तो?"
यहीं से जन्म हुआ..."मैंने प्यार किया" के उस यादगार "मिरर किस" सीन का। दोनों कलाकारों के बीच एक शीशा रखा गया...कैमरा चला...नज़रों में प्यार था...भावनाएँ सच्ची थीं...लेकिन दोनों के बीच मर्यादा की एक पारदर्शी दीवार भी थी और शायद यही वजह है...कि यह दृश्य आज भी सिर्फ एक किसिंग सीन नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे खूबसूरत, सादगीभरे और रचनात्मक रोमांटिक दृश्यों में गिना जाता है।

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